जैव प्रक्रियाएँ ( Life Processes ) Part-05 परिवहन

 परिवहन ( Transportation)


      परिवहन एक ऐसी क्रिया है जिसमें जीवों के शरीर के किसी एक अंग में अवशोषित अथवा बने पदार्थ को किसी दूसरे अंग में ले जाया जाता है। सभी जीवधारियों को भोजन, ऑक्सीजन, जल, तथा अन्य पदार्थों के परिवहन की आवश्यकता पड़ती है। जिसके लिए इनमें एक विकसित परिवहन तन्त्र होता है। 


पौधों में परिवहन (Transport in Plants)


          पौधे ऑक्सीजन और कार्बनडाई ऑक्साइड का परिवहन तो विसरण के द्वारा सीधे वायुमण्डल से कर लेते हैं। परंतु, जल, खनिज, भोजन,और हॉर्मोन का परिवहन करने के लिए उनमें अलग से एक परिवहन तन्त्र विकसित होता है। पौधों में मुख्यतया दो परिवहन तंत्र होते हैं- 


1 . दारू (Xylem) - जो जल और खनिज पदार्थों को जड़ो से लेकर पौधे के विभिन्न भागों तक पहुंचते हैं। जाइलेम  कोशिकाओं में जल एक तो केशिकात्व के आधार पर भी चढ़ता है, लेकिन यह उन पौधों के लिए तो सही है जिनमें पट्टी और जड़ों के बीच दूरी कम है। ऊंचे वृक्षों में पत्तियों के रंध्र द्वारा जल का वाष्पीकरण किया जाता है, जिसे हम वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।  पत्तियों की कोशिकाओं में वाष्पोत्सर्जन के फलस्वरूप एक प्रकार का चूषण बल उत्पन्न होता है, जो जड़ों से पौधे के शीर्ष तक पानी को पंहुचाने में सहायक होता है। अतः दारू (Xylem) में जल वाष्पोत्सर्जन की सहायता से ऊपर की ओर चढ़ता है। 



2 . वल्कल (Phloem) - पौधे में जो खाद्य पदार्थ बनते हैं , तथा उत्सर्जित हॉर्मोन को पौधे के विभिन्न भागों तक पंहुचाते हैं।पत्तियों में बना भोजन फ्लोएम की कोशिकाओं द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पंहुचाया जाता है। इसके लिए किसी प्रकार की बल की आवश्यकता नहीं है बल्कि फ्लोएम में स्थानांतरण ऊर्जा के उपयोग से होता है। पत्तियों में निर्मित शर्करा परासरण द्वारा फ्लोएम की चालनी कोशिका में आ जाता है। जहाँ से ATP के प्रयोग से ऊर्जा का उपयोग करते हुए यह पौधे के जिस भाग में जरूरत है वहां भेज दिया जाता है। 




रुधिर (Blood) 


रुधिर एक लाल रंग का द्रव है जो हमारे शरीर में प्रवाहित होता है। यह हमारे शरीर में परिवहन का मुख्य भाग है। इसका लाल रंग लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन वर्णक के कारण होता है। रुधिर 4 मुख्य अवयवों का बना होता है-

1. प्लाज्मा (Plasma) 

2. लाल रुधिर कणिकाएं ( Red Blood Corpuscles)

3. श्वेत रुधिर कणिकाएं ( White Blood Corpuscles)

4. पट्टिकाणु ( Platelets) 



मानव शरीर में रुधिर के परिसंचरण के लिए 3 प्रकार की वाहिकाएं होती हैं ।

1- धमनियाँ

2- शिराएं

3- केशिकाएं 




मानव परिसंचरण तन्त्र (HUMAN CIRCULATORY SYSTEM) 


मानव के परिसंचरण तंत्र में हृदय, धमनी, शिराएं, और केशिकाएं आती हैं। हमारा हृदय परिसंचरण तंत्र में रुधिर को शरीर की प्रत्येक कोशिका में पंहुचाने हेतु एक पम्प का कार्य करता है। हृदय की संरचना चित्र के अनुसार होती है। 








मानव हृदय मुख्य रूप से 4 कोष्ठों में बंटा होता है। बायां अलिंद, बायां निलय, दायाँ अलिंद,दायाँ निलय।

हमारे शरीर से अशुद्ध रक्त सर्वप्रथम दाएं अलिंद में प्रवेश करता है। अलिंद के बाद रक्त दांये निलय में प्रवेश करता है। जहां पेशीय संकुचन के बाद रक्त हमारे फेफड़ों को भेज दिया जाता है। इसके बाद रक्त फेफड़ों से ऑक्सीजन को ग्रहण करके बायें अलिंद में प्रवेश करता है। जहां से पेशीय संकुचन के बाद रक्त बायें निलय में प्रवेश करता है। नीले से रक्त एक दाब के साथ हमारे शरीर की और भेज दिया जाता है। रक्त का प्रवाह विपरीत ना हो इसके लिए हमारे हृदय में वाल्व लगे रहते हैं जो प्रत्येक कक्ष को एक दूसरे से अलग करते हैं। निलय की दीवारें अलिंद की तुलना में ज्यादा मोटी ओर पेशीय होती हैं, क्योंकि निलय को ज्यादा दाब के साथ रक्त को आगे भेजना पड़ता है। 



इस प्रकार मानव में परिवहन होता है। रक्त ऑक्सीजन, कार्बनडाई ऑक्साइड , भोज्य पदार्थों तथा नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों का स्थानांतरण करता है। 

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