नियंत्रण एवं समन्वय// Control and Coordination // Science Class-10

 सभी जीव अपने वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया दिखाते हैं और सक्रिय रहते हैं। वातावरण में परिवर्तन जिनके प्रति जीव प्रतिक्रिया दिखाते हैं उद्दीपक कहलाते हैं। उद्दीपकों के प्रति जीवों की अनुक्रिया प्रायः उनके शरीर अंग की गति के द्वारा होती है। 

उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया जीवों का एक अभिलाक्षणिक गुण है। जंतु अनेक तरीकों से उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया दिखाते हैं क्योंकि इनमें एक तांत्रिक तंत्र होता है। परंतु पौधों में यह सीमित होता है क्योंकि पौधों में कोई तांत्रिक तंत्र नहीं होता है। 


उद्दीपकों के प्रति उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए किसी जीव के विभिन्न अंगों का सुसंगठित ढंग से कार्य करना समन्वयन कहलाता है। 


पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय ( Control and Coordination in Plants)


पौधे उद्दीपकों जैसे प्रकाश, गुरुत्व, रसायन, जल आदि के प्रति अनुक्रिया करते हैं। पौधे हॉर्मोन के प्रयोग द्वारा इन उद्दीपकों के प्रति व्यवहार को समन्वित करते हैं। पौधें बढ़ते हुए बहुत धीरे धीरे विभिन्न उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया करते हैं। 



पादप होर्मोन-

        पौधों में चार प्रकार के पादप होर्मोन होते हैं, जो पौधों में नियंत्रण और समन्वय का कार्य करते हैं। ये निम्निलिखित हैं--


1- ऑक्सिन (Auxins) - यह वृद्धि होर्मोन है। जो पौधों के वृद्धि वाले भागों में बहुतायत से पाया जाता है। इसके प्रभाव से कोशिका विवर्धन एवं विभेदन प्रभावित होता है।


2- जिबरेलिन (Gibberellin) - यह भी एक वृद्धि हॉर्मोन है, जो ऑक्सिन कि उपस्थिति में कोशिका वृद्धि और विभेदन को प्रोत्साहित करता है।


3- साइटोकाईनिन (Cytokinin) - यह फल वृद्धि को प्रोत्साहित करता है, और कलियों के वृद्धि में सहायक है।


4- एब्सिसिक अम्ल ( Abscisic Acid) - यह एक संदमक हॉर्मोन है जो पौधों की वृद्धि को रोकता है। 




पादप गतियाँ


       पौधे जड़ों के सहारे भूमि से जुड़े रहते हैं इसलिए वे एक स्थान से दूसरे स्थान को चल फिर नहीं सकते हैं। फिर भी वे बाहरी उद्दीपकों से प्रभावित होकर कुछ स्थानों पर गतियाँ दिखाते हैं। जो अनुवर्तन ओर अनुकुञ्चन प्रकार की होती हैं। कुछ गतियाँ निम्नलिखित प्रकार की हैं--


1- प्रकाशानुवर्तन - प्रकाश के प्रभाव से अनुक्रिया स्वरूप पौधे के किसी भाग की गति प्रकाशानुवर्तन कहलाती है। 


2- गुरुत्वानुवर्तन - गुरुत्व की अनुक्रिया के फलस्वरूप पौधे के किसी भाग की गति गुरुत्वानुवर्तन कहलाती है।


3- रसायानुवर्तन - किसी रासायनिक उद्दीपक की उपस्थिति में पौधे द्वारा की जाने वाली अनुक्रिया रसायानुवर्तन कहलाती है।


4- जलानुवर्तन - जल की अनुक्रिया में पोधे की गति जलानुवर्तन कहलाती है। 


5- स्पर्शानुवर्तन - किसी वस्तु के स्पर्श के प्रति अनुक्रिया में पौधे के किसी भाग में गति स्पर्शानुवर्तन कहलाती है। 


6 - स्पर्शानुकुंचन - किसी वस्तु के स्पर्श के प्रति अनुक्रिया में पौधे के किसी भाग या अंग की गति स्पर्शानुकुंचन कहलाती है। जैसे छूई मुई के पौधे की पत्तियों को स्पर्श करने पर उसकी पत्तियां मुरझा जाती हैं। 


7 - प्रकाशानुकुंचन - इस प्रकार की अनुक्रिया में पोधे का कोई भाग प्रकाश के प्रति गति करता है। जैसे फूलों की पंखुड़ियों का खिलना और मुरझाना। 






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